एकादशी · 2027
पापमोचिनी एकादशी 2027 — शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
पापमोचिनी एकादशी शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027 को है (नई दिल्ली)। पारण 3 अप्रैल को 13:39 – 16:09 के बीच।
नई दिल्ली के लिए गणना
शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027
- तिथि
- कृष्ण एकादशी: 2 अप्रैल, 00:45 – 3 अप्रैल, 02:52
- चांद्र मास
- चैत्र (पूर्णिमांत) / फाल्गुन (अमांत)
- सूर्योदय / सूर्यास्त
- 06:10 / 18:39
- अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले)
- 04:34
- हरि वासर समाप्त
- 3 अप्रैल, 09:16
| पारण (व्रत खोलने का समय) | 3 अप्रैल, 13:39 – 3 अप्रैल, 16:09 |
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नियम: स्मार्त नियम: सूर्योदय के समय एकादशी वाला दिन, अगली सुबह पारण के लिए द्वादशी रहे।
स्मार्त और वैष्णव
इस बार दोनों परंपराएँ एक ही दिन व्रत रखती हैं: अरुणोदय (04:34) तक एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए दिन दशमी-विद्धा नहीं है।
वैष्णव दिन केवल अरुणोदय वाले सरल नियम से है; इस्कॉन अपना कैलेंडर अपने स्थान के लिए बनाता है, इसलिए अपने मंदिर से मिला लें।
पारण कैसे तय हुआ
व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है — हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग, जो 09:16 पर समाप्त होता है) के बाद, हो सके तो प्रातः काल में, और मध्याह्न से बचते हुए। द्वादशी रहते पारण न हो तो उसका पुण्य कम माना जाता है।
सभी समय हमारे अपने इंजन से, नई दिल्ली के सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर। दूसरे शहर में समय कुछ मिनट खिसकते हैं, और कभी-कभी दिन भी। अपने शहर का पंचांग
पापमोचिनी एकादशी का महत्व
पापमोचिनी एकादशी चैत्र के कृष्ण पक्ष (अमांत में फाल्गुन) में, होली और चैत्र नवरात्रि के बीच आती है — चांद्र वर्ष की अंतिम एकादशी। पापमोचिनी का अर्थ है “पापों से छुड़ाने वाली”, और इसे साल को साफ़ मन से पूरा करने के भाव से रखा जाता है।
व्रत कथा
च्यवन ऋषि के पुत्र युवा मेधावी मुनि चैत्ररथ वन में गहरी तपस्या कर रहे थे, तभी अप्सरा मंजुघोषा उनका ध्यान भंग करने आई। वे बरसों तक अपनी तपस्या भूले रहे; होश आने पर उन्होंने क्रोध में उसे पिशाचिनी होने का शाप दे दिया। उसने मुक्ति की विनती की, और मुनि को भी अपनी चूक का बोझ महसूस हुआ। उनके पिता च्यवन ने दोनों को पापमोचिनी एकादशी रखने को कहा, और दोनों मुक्त हो गए।
कथा का सार, पद्म पुराण और भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य से।
एकादशी कैसे रखें
- व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक चलता है। बहुत से लोग दशमी की शाम, व्रत शुरू होने से पहले, एक बार सादा और सात्विक भोजन करते हैं।
- परंपरा में अन्न और दालें, खासकर चावल, नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, मेवे और फलाहार — साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू — आम तौर पर लिए जाते हैं; हर परिवार का रिवाज थोड़ा अलग होता है।
- व्रत के कई स्तर हैं: निर्जला (बिना पानी), फलाहार (फल और दूध), या बिना अन्न का एक समय भोजन। जो आपके शरीर के अनुकूल हो, वही चुनें; सबके लिए एक ही नियम ज़रूरी नहीं है।
- दिन भगवान विष्णु की पूजा में बीतता है: तुलसी, दीपक, विष्णु सहस्रनाम या ओम नमो भगवते वासुदेवाय जैसा मंत्र, और उस एकादशी की कथा। तुलसी के पत्ते प्रायः एक दिन पहले तोड़ लिए जाते हैं, क्योंकि बहुत से लोग एकादशी पर तुलसी नहीं तोड़ते।
- कुछ लोग रात में भजन-कीर्तन के साथ जागरण करते हैं, और बहुत से लोग अन्न या भोजन का दान करते हैं।
- पारण द्वादशी को सूची में दिए समय के भीतर होता है: हरि वासर के बाद, हो सके तो सुबह के समय, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। व्रत प्रायः किसी हल्की चीज़ से, अक्सर थोड़ा तुलसी-जल लेकर खोला जाता है।
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ, बुज़ुर्ग, मधुमेह के रोगी, नियमित दवा लेने वाले या अस्वस्थ लोग हल्का व्रत रख सकते हैं — फल और दूध, या एक समय भोजन — या केवल पूजा-पाठ से दिन मना सकते हैं। कोई बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पापमोचिनी एकादशी 2027 कब है?
पापमोचिनी एकादशी शुक्रवार, 2 अप्रैल 2027 को है (नई दिल्ली)। कृष्ण एकादशी तिथि 2 अप्रैल, 00:45 – 3 अप्रैल, 02:52 तक रहती है।
पापमोचिनी एकादशी का पारण कब है?
पारण शनिवार, 3 अप्रैल 2027 को 13:39 – 16:09 के बीच, हरि वासर के बाद और द्वादशी रहते।
क्या वैष्णव पापमोचिनी एकादशी अलग दिन है?
नहीं। अरुणोदय के समय एकादशी शुरू हो चुकी है, इसलिए स्मार्त और वैष्णव दोनों 2 अप्रैल 2027 को व्रत रखते हैं।