महाशिवरात्रि 2027 में शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। सबसे मुख्य पूजा का समय, निशीथ काल, नई दिल्ली में 6-7 मार्च की रात 12:07 से 12:56 बजे तक है, क्योंकि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी 6 तारीख को दोपहर 12:03 बजे शुरू होकर 7 तारीख को दोपहर 1:46 बजे तक रहती है।
सीधे शब्दों में: व्रत और रात्रि जागरण शनिवार 6 तारीख को है, और बीच रात की मुख्य पूजा घड़ी में बारह बजने के ठीक बाद, यानी रविवार 7 तारीख की शुरुआत में पड़ती है। निशीथ काल शहर के हिसाब से खिसकता है, सुदूर पूर्व में रात 11 बजे के आसपास से लेकर पश्चिम में 1 बजे के बाद तक; नीचे मुख्य शहरों की तालिका है।
तारीख, तिथि और मुख्य समय
| विवरण | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|
| चतुर्दशी प्रारंभ | 6 मार्च 2027, दोपहर 12:03 |
| सूर्यास्त | 6 मार्च, शाम 6:23 |
| निशीथ काल | रात 12:07 से 12:56 (6-7 मार्च की रात) |
| चतुर्दशी समाप्त | 7 मार्च 2027, दोपहर 1:46 |
6 तारीख को नई दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:41 बजे है। पर्व की पूरी जानकारी, आसपास की तिथियों के साथ, हमारे महाशिवरात्रि पेज पर है।
6 मार्च ही क्यों: निशीथ का नियम
अधिकतर त्योहार सूर्योदय की तिथि से तय होते हैं। शिवरात्रि अलग है, यह रात का पर्व है। निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु का नियम है कि महाशिवरात्रि उस रात मनाई जाए जिस रात कृष्ण चतुर्दशी निशीथ यानी आधी रात के मुहूर्त में हो (निशीथव्यापिनी चतुर्दशी)।
2027 में यह जाँच आसान है:
- 6 मार्च की रात: चतुर्दशी उसी दिन दोपहर 12:03 बजे शुरू हुई और आधी रात के पार तक चलती है, इसलिए निशीथ काल (12:07 से 12:56) पूरा चतुर्दशी में है।
- 7 मार्च की रात: चतुर्दशी उस दिन दोपहर 1:46 बजे ही खत्म हो गई, इसलिए आधी रात अमावस्या में है।
केवल 6 तारीख की रात शर्त पूरी करती है, इसलिए पंचांगों में 6 मार्च पर ही सहमति होनी चाहिए। जिन सालों में चतुर्दशी दो रातों के निशीथ को छूती है या किसी को नहीं, तब ग्रंथ अतिरिक्त नियम देते हैं, और तभी अलग-अलग तारीखें दिखती हैं; 2027 ऐसा साल नहीं है।
निशीथ काल क्या है, और यह शहर के हिसाब से क्यों बदलता है
सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को 15 मुहूर्तों में बाँटा जाता है। इनमें आठवाँ मुहूर्त, जो स्थानीय आधी रात के आर-पार होता है, निशीथ कहलाता है। मार्च की शुरुआत में यह लगभग 48-49 मिनट का होता है।
क्योंकि यह स्थानीय सूर्यास्त और सूर्योदय से बँधा है, निशीथ स्थानीय समय है। पूर्व के शहरों में सूर्य पहले डूबता है, इसलिए उनकी आधी रात का मुहूर्त घड़ी में पहले आता है; पश्चिम में बाद में। पूरा भारत एक ही घड़ी (भारतीय मानक समय) चलाता है, इसीलिए यह अंतर इतना साफ़ दिखता है।
| शहर | सूर्यास्त (6 मार्च) | निशीथ काल |
|---|---|---|
| गुवाहाटी | शाम 5:26 | रात 11:09 से 11:58 |
| कोलकाता | शाम 5:42 | रात 11:23 से 12:11 |
| पटना | शाम 5:53 | रात 11:36 से 12:24 |
| वाराणसी | शाम 6:02 | रात 11:44 से 12:33 |
| प्रयागराज | शाम 6:06 | रात 11:49 से 12:38 |
| लखनऊ | शाम 6:09 | रात 11:52 से 12:41 |
| चेन्नई | शाम 6:18 | रात 11:55 से 12:44 |
| हैदराबाद | शाम 6:23 | रात 12:03 से 12:51 |
| देहरादून | शाम 6:19 | रात 12:04 से 12:53 |
| बेंगलुरु | शाम 6:29 | रात 12:06 से 12:54 |
| नई दिल्ली | शाम 6:23 | रात 12:07 से 12:56 |
| भोपाल | शाम 6:25 | रात 12:07 से 12:55 |
| जयपुर | शाम 6:30 | रात 12:13 से 1:02 |
| इंदौर | शाम 6:32 | रात 12:13 से 1:02 |
| अमृतसर | शाम 6:31 | रात 12:16 से 1:06 |
| पुणे | शाम 6:41 | रात 12:21 से 1:09 |
| मुंबई | शाम 6:45 | रात 12:25 से 1:13 |
| अहमदाबाद | शाम 6:44 | रात 12:26 से 1:15 |
आधी रात के बाद के समय 6 मार्च की ही रात के हैं, भले कैलेंडर की तारीख 7 हो गई हो। जो शहर इस सूची में नहीं है, उसके लिए पास के शहर के पंचांग में सूर्योदय-सूर्यास्त देखें; काशी विश्वनाथ के भक्तों के लिए वाराणसी का पंचांग अच्छा संदर्भ है।
रात के चार प्रहर
बहुत से भक्त रात में चार बार शिव पूजा करते हैं, हर प्रहर में एक बार: सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात के चार बराबर हिस्से। पहला प्रहर सूर्यास्त से शुरू होता है; निशीथ काल रात के बीच में, दूसरे और तीसरे प्रहर की सीमा पर पड़ता है। प्रहर आपके अपने सूर्यास्त और सूर्योदय पर निर्भर हैं, इसलिए ये भी निशीथ की तरह शहर के साथ खिसकते हैं; दोनों समय आपके शहर के पंचांग में हैं। अधिकतर मंदिर अपने प्रहर-पूजा के समय स्वयं बताते हैं, और अपने मंदिर के समय का पालन करना बिलकुल ठीक है।
चारों प्रहर की पूजा संभव न हो, तो परंपरा स्वयं इसमें सहज है: ग्रंथ विशेष रूप से निशीथ की पूजा पर बल देते हैं, और रात में एक सच्चे मन की पूजा ही इस व्रत का सार है।
व्रत और पारण
व्रत आम तौर पर 6 मार्च की सुबह से रात भर रखा जाता है। पारण परंपरा से 7 मार्च की सुबह, सूर्योदय के बाद किया जाता है; बहुत से परिवार चतुर्दशी खत्म होने से पहले पारण का नियम भी मानते हैं, जो 2027 में नई दिल्ली में दोपहर 1:46 बजे है। यानी सुबह का समय आराम से मिलता है।
व्रत के तरीके बहुत अलग-अलग हैं, निर्जल से लेकर फल और दूध तक। अगर आपको कोई बीमारी है, आप गर्भवती हैं या बुज़ुर्ग हैं, तो पहले डॉक्टर की सलाह मानें; परंपरा स्वयं ज़रूरत वाले को हल्का व्रत रखने की छूट देती है।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि
साल की हर कृष्ण चतुर्दशी मासिक शिवरात्रि है, और वह भी आधी रात के इसी नियम से मनाई जाती है। फाल्गुन (अमांत में माघ) की चतुर्दशी महाशिवरात्रि है। उत्तर और दक्षिण में महीने का नाम केवल महीने गिनने के दो तरीकों के कारण अलग है; दिन वही है। सभी मासिक तिथियाँ हमारे मासिक शिवरात्रि पेज पर हैं।
महाशिवरात्रि 2027 के आसपास
- 11 फ़रवरी 2027: बसंत पंचमी, पिछला बड़ा पर्व।
- 15 मार्च 2027, सुबह 7:00: सूर्य का मीन राशि में प्रवेश, और वसंत का खरमास शुरू।
- 16 से 21 मार्च 2027: होलाष्टक, जो 21 मार्च को होलिका दहन और 22 मार्च को होली के साथ पूरा होता है (इस साल की भद्रा वाली उलझन हमारे होली 2027 लेख में)।
- शनि 3 जून 2027 तक मीन राशि में रहेंगे; अपनी चंद्र राशि का गोचर देखते हों तो शनि का मेष गोचर 2027 पेज पर तारीखें हैं।
कुछ वेबसाइटों पर समय अलग क्यों
- शहर। नई दिल्ली के लिए बनी तालिका गुवाहाटी या अहमदाबाद में एक घंटे तक अलग हो सकती है।
- निशीथ की परिभाषा। हम रात के 15 मुहूर्तों में आठवाँ लेते हैं। कुछ साइटें घड़ी के ठीक 12 बजे के आसपास एक तय समय दिखाती हैं, जो भारत के अधिकतर हिस्सों में असली निशीथ नहीं है।
- प्रहर। कुछ चारों प्रहर दिखाते हैं, कुछ केवल निशीथ; पर्व का दिन दोनों में एक ही है।
खुद देखें
महाशिवरात्रि पेज पर तारीख और रात के समय हैं, और पंचांग आपके शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि देता है। साल भर की मासिक शिवरात्रि के लिए मासिक शिवरात्रि सूची देखें। उस दिन अपनी चंद्र राशि और नक्षत्र जानने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाएँ।