बसंत पंचमी (वसंत पंचमी) 2027 में गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027 को है। नई दिल्ली में सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त दिन का पहला आधा भाग है, सुबह 7:02 से दोपहर 12:35 तक, क्योंकि माघ शुक्ल पंचमी 11 तारीख को तड़के 3:04 बजे शुरू होकर 12 तारीख को तड़के 3:18 बजे तक रहती है।
इस बार "11 या 12?" वाली उलझन नहीं है: 11 तारीख की पूरी सुबह पंचमी में है और 12 तारीख को सूर्योदय से पहले ही पंचमी खत्म हो जाती है। जो बदलता है, वह है शहर के हिसाब से पूजा की घड़ी, क्योंकि सूर्योदय और मध्याह्न हर शहर में अलग समय पर होते हैं। नीचे मुख्य शहरों की तालिका है।
तारीख और तिथि
| विवरण | समय (नई दिल्ली) |
|---|---|
| पंचमी तिथि प्रारंभ | 11 फ़रवरी 2027, तड़के 3:04 |
| सूर्योदय | 11 फ़रवरी, सुबह 7:02 |
| पूजा मुहूर्त (पूर्वाह्न) | सुबह 7:02 से दोपहर 12:35 |
| सूर्यास्त | 11 फ़रवरी, शाम 6:07 |
| पंचमी तिथि समाप्त | 12 फ़रवरी 2027, तड़के 3:18 |
शुक्ल पक्ष होने के कारण महीना अमांत और पूर्णिमांत, दोनों गणनाओं में माघ ही है। पर्व की पूरी जानकारी, आसपास के त्योहारों के साथ, वसंत पंचमी पेज पर है।
नियम: सुबह की पंचमी
बसंत पंचमी सुबह का पर्व है। निर्णय सिंधु में दिया गया उत्तर भारत का नियम सीधा है: पर्व उस दिन मनाएँ जिस दिन माघ शुक्ल पंचमी पूर्वाह्न को छुए, यानी सूर्योदय से मध्याह्न तक का समय। अगर पंचमी दो दिन पूर्वाह्न को छुए, तो पहला दिन लिया जाता है।
2027 में केवल एक ही दिन यह शर्त पूरी करता है। पंचमी 11 फ़रवरी की आधी रात के बाद शुरू होती है, इसलिए 11 तारीख का पूरा पूर्वाह्न पंचमी में है; और 12 तारीख को यह 3:18 बजे खत्म हो जाती है, इसलिए 12 तारीख के पूर्वाह्न में पंचमी नहीं है। इसीलिए इस बार पंचांगों में 11 फ़रवरी पर ही सहमति होनी चाहिए। कुछ सालों में पंचमी दिन चढ़े शुरू होती है, तब पंचांग दो दिनों में बँट जाते हैं; 2027 ऐसा साल नहीं है।
शहरवार सरस्वती पूजा का समय
पूजा का समय स्थानीय सूर्योदय से स्थानीय मध्याह्न (सूर्योदय और सूर्यास्त का ठीक बीच) तक है। पंचमी तिथि पूरे भारत में एक ही क्षण पर शुरू-खत्म होती है, पर सूर्योदय और मध्याह्न नहीं।
| शहर | सूर्योदय | पूजा का समय (पूर्वाह्न) |
|---|---|---|
| कोलकाता | 6:11 | सुबह 6:11 से 11:50 |
| गुवाहाटी | 6:01 | सुबह 6:01 से 11:37 |
| पटना | 6:27 | सुबह 6:27 से दोपहर 12:03 |
| गया | 6:27 | सुबह 6:27 से दोपहर 12:04 |
| वाराणसी | 6:35 | सुबह 6:35 से दोपहर 12:12 |
| प्रयागराज | 6:40 | सुबह 6:40 से दोपहर 12:16 |
| लखनऊ | 6:45 | सुबह 6:45 से दोपहर 12:20 |
| चेन्नई | 6:32 | सुबह 6:32 से दोपहर 12:23 |
| हैदराबाद | 6:44 | सुबह 6:44 से दोपहर 12:30 |
| बेंगलुरु | 6:43 | सुबह 6:43 से दोपहर 12:33 |
| भोपाल | 6:55 | सुबह 6:55 से दोपहर 12:34 |
| नई दिल्ली | 7:02 | सुबह 7:02 से दोपहर 12:35 |
| जयपुर | 7:06 | सुबह 7:06 से दोपहर 12:41 |
| पुणे | 7:04 | सुबह 7:04 से दोपहर 12:48 |
| मुंबई | 7:08 | सुबह 7:08 से दोपहर 12:52 |
| अहमदाबाद | 7:14 | सुबह 7:14 से दोपहर 12:53 |
दो बातें साफ़ दिखती हैं। पूर्व में पूजा पश्चिम से लगभग एक घंटा पहले शुरू होती है (गुवाहाटी 6:01, अहमदाबाद 7:14)। और फ़रवरी में दक्षिण का पूर्वाह्न उत्तर से लंबा है, क्योंकि इन दिनों भूमध्य रेखा के पास दिन बड़े होते हैं। किसी और शहर के लिए दैनिक पंचांग में सूर्योदय-सूर्यास्त देखें; जैसे पटना का पंचांग या कोलकाता का पंचांग, जहाँ सरस्वती पूजा साल के सबसे बड़े दिनों में से है।
पूरी पूजा किसी एक मिनट में समेटने की ज़रूरत नहीं। परंपरा बस इतना कहती है कि पूजा सुबह, पंचमी रहते हो, और 2027 में यह पूरा पूर्वाह्न है।
यह दिन किस बात का है
परंपरागत पंचांग में बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का दिन है और ज्ञान, वाणी और संगीत की देवी सरस्वती को समर्पित है। रीति-रिवाज़ क्षेत्र के हिसाब से बदलते हैं, पर कुछ बातें लगभग हर जगह हैं:
- घरों, स्कूलों और पंडालों में सरस्वती पूजा, देवी के सामने किताबें, कलम और वाद्य रखे जाते हैं।
- पीला रंग: पीले वस्त्र, पीले फूल और केसरिया मीठे चावल, सरसों के फूलों की याद में।
- बहुत से परिवारों में छोटे बच्चों का अक्षरारंभ (विद्यारंभ)।
- ब्रज में परंपरा से होली का मौसम इसी दिन से शुरू माना जाता है; होलिका दहन 21 मार्च 2027 को है (देखें हमारा होली 2027 लेख)।
इनमें से किसी के लिए सुबह के समय से आगे किसी खास मिनट की ज़रूरत नहीं, और न ही कुछ खरीदने की।
अबूझ मुहूर्त, और हमारा कैलेंडर क्या कहता है
बहुत से परिवार बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त मानते हैं: ऐसा दिन जिसमें विवाह, सगाई या गृह प्रवेश के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने की ज़रूरत नहीं। यह जीवंत परंपरा है और हम इसका सम्मान करते हैं।
हमारा मुहूर्त खोजक अलग तरीके से काम करता है: वह हर दिन को तय नियमों पर जाँचता है (नक्षत्र, तिथि, वार, राहु काल, भद्रा, और खरमास, चातुर्मास, शुक्र या गुरु अस्त जैसी रोक)। 2027 के विवाह मुहूर्त में नई दिल्ली के लिए 11 फ़रवरी इन नियमों पर भी खरा उतरता है, इसलिए यह हमारी सूची में भी है। फ़रवरी 2027 साल के अच्छे विवाह-महीनों में से है, उस जनवरी के बाद जिसमें खरमास खत्म होने पर 15 तारीख से ही शुभ दिन शुरू होते हैं। दिन-ब-दिन सूची फ़रवरी 2027 विवाह मुहूर्त पेज पर है, और पूरा साल, अगस्त से अक्टूबर खाली क्यों हैं इसके साथ, हमारे विवाह मुहूर्त 2027 लेख में।
बसंत पंचमी 2027 के आसपास आकाश
- 6 फ़रवरी 2027: वलयाकार सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए यहाँ सूतक नहीं।
- 9 फ़रवरी से 3 मार्च 2027: बुध वक्री, कुंभ से पीछे मकर में लौटते हुए। परंपरा इसे बातचीत और कागज़ात दोबारा जाँचने का समय मानती है, इससे अधिक कुछ नहीं।
- 13 फ़रवरी 2027, सुबह 10:09: सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश (कुंभ संक्रांति)।
- 21 फ़रवरी 2027: तड़के हल्का उपच्छाया चंद्र ग्रहण, दिखेगा पर पहचानना कठिन, सूतक नहीं।
- 6 मार्च 2027: महाशिवरात्रि, अगला बड़ा पर्व।
2027 की सारी तिथियाँ, महीने के हिसाब से, त्योहार कैलेंडर 2027 में हैं।
कुछ वेबसाइटों पर समय अलग क्यों
- कौन-सा समय दिखाया गया। हम पूरा पूर्वाह्न (सूर्योदय से मध्याह्न) दिखाते हैं। कुछ साइटें उसके भीतर का छोटा "सबसे अच्छा" हिस्सा दिखाती हैं, अक्सर चौघड़िया या लग्न के आधार पर; यह प्रस्तुति का फ़र्क है, पर्व का दिन नहीं बदलता।
- शहर। नई दिल्ली के लिए बनी तालिका कोलकाता या मुंबई में एक घंटे तक गलत हो सकती है।
- गोलाई और शहर का बिंदु। एक-दो मिनट का अंतर शहर के सटीक अक्षांश-देशांतर और गोलाई से आता है।
खुद देखें
वसंत पंचमी पेज पर तारीख और पूजा का समय है, और अपने शहर का पंचांग आपका सूर्योदय और तिथि बताता है। अगर इस मौसम में विवाह की योजना है, तो फ़रवरी 2027 विवाह मुहूर्त की सूची से शुरू करें।