मेष राशि वैदिक राशि चक्र की पहली राशि है, जो निरयन गणना में 0° से 30° तक फैली है। इसका स्वामी मंगल है, तत्व अग्नि और स्वभाव चर है; जन्म के समय चंद्रमा यहाँ हो तो आपकी राशि मेष है, और आपका राशिफल, साढ़े साती और गुण मिलान इसी से गिने जाते हैं।
राशि, लग्न और सूर्य राशि: तीन अलग बातें
भारत में जब कोई पूछता है "आपकी राशि क्या है", तो उसका मतलब जन्म राशि यानी चंद्र राशि से होता है। लग्न वह राशि है जो जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही थी, और उसी से बारह भाव बनते हैं। सूर्य राशि वह है जहाँ जन्म के समय सूर्य था; अख़बारों के पश्चिमी राशिफल इसी की सायन गणना पर चलते हैं।
वैदिक ज्योतिष निरयन राशि चक्र मानता है, जो लाहिड़ी अयनांश के अनुसार आज सायन से लगभग 24° पीछे है। इसलिए पश्चिमी गणना में "Aries" कहे जाने वाले बहुत से लोगों का वैदिक सूर्य मीन में निकलता है। सूर्य हर साल लगभग 14 अप्रैल को निरयन मेष में प्रवेश करता है; यही मेष संक्रांति है, जिस दिन बैसाखी और कई प्रांतों का नया वर्ष पड़ता है। आपके लिए इन तीनों में मेष कौन-सा है, यह मुफ़्त कुंडली बनाकर तुरंत देखा जा सकता है।
अग्नि, चर और मंगल: तीनों का मेल
अग्नि तत्व ताप, प्रकाश और कुछ कर गुज़रने की ललक है। चर राशियाँ शुरुआत करती हैं और चीज़ों को गति में रखती हैं। मंगल साहस, ऊर्जा और रक्षा करने की इच्छा का ग्रह है। तीनों मिलकर मेष को राशि चक्र की सबसे सीधी, सबसे तेज़ राशि बनाते हैं; यह धीमी जलती लौ नहीं, पहली चिंगारी है।
कालपुरुष के शरीर में मेष सिर है। इसकी दिशा पूर्व है, प्रतीक मेढ़ा है, और यह पृष्ठोदय राशि है, यानी पीठ की ओर से उदय होने वाली। वराहमिहिर के बृहज्जातक में मेष के चंद्रमा वाले जातक को काम में तत्पर, यात्रा-प्रिय और साहसी बताया गया है, और बाद के ग्रंथ भी फुर्ती और पराक्रम का यही चित्र दोहराते हैं।
मेष राशि के तीन नक्षत्र
मेष में अश्विनी (0° से 13°20′), भरणी (13°20′ से 26°40′) और कृत्तिका का पहला चरण (26°40′ से 30°) आते हैं। राशि मोटी रेखा खींचती है, नक्षत्र उसमें रंग भरता है।
अश्विनी का स्वामी केतु है और देवता देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमार। यहाँ मेष की ऊर्जा फुर्ती, ताज़गी और ज़रूरतमंद तक समय पर मदद पहुँचाने की प्रवृत्ति में दिखती है। अश्विनी का आरंभ उन तीन गंडांत संधियों में से एक है जहाँ जल राशि से अग्नि राशि शुरू होती है; परंपरा इसे सावधानी से देखने को कहती है, डरने को नहीं।
भरणी का स्वामी शुक्र है और देवता यम। यह राशि का सबसे गहरा हिस्सा है: धारण करना, सँभालना और किसी काम को उसके अंत तक ले जाना। यहाँ का मेष अधिक रसिक भी है और कर्तव्य के प्रति अधिक गंभीर भी।
कृत्तिका के पहले चरण का स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं, और इसका नवांश धनु है। यह हिस्सा परखने की तीक्ष्णता और सिखाने की प्रवृत्ति जोड़ता है। इसीलिए दो मेष राशि वाले लोग एक-दूसरे से काफ़ी अलग लग सकते हैं।
स्वभाव और खूबियाँ
मेष का मन साफ़ लक्ष्य और शुरू करने का इशारा चाहता है। जिनका चंद्रमा यहाँ है, वे अक्सर खरी बात कहने वाले, शरीर से चुस्त और सबसे आगे रहने में सुखी होते हैं: पहले हाथ उठाना, पहले प्रयास करना, किसी के साथ अन्याय हो तो पहले बोलना। असफलता से जल्दी उबर जाते हैं और मन में गाँठ कम ही बाँधते हैं। संकट के समय नेतृत्व इन्हें सहज आता है।
किन बातों पर काम करें
यही आग कभी-कभी तथ्यों से आगे दौड़ जाती है। इस राशि के सामान्य सबक हैं: धीमे लोगों के साथ धैर्य, जोश में शुरू किए काम को पूरा करना, और गुस्से में जवाब देने से पहले एक पल रुकना। चर राशि होने से किसी काम का नयापन खत्म होते ही ऊब आ सकती है। यह सब पत्थर की लकीर नहीं है; अच्छा शनि, बलवान बुध या पृथ्वी तत्व का लग्न मेष के चंद्रमा को काफ़ी स्थिर कर सकता है। कोई एक योग पूरी कुंडली का फ़ैसला नहीं करता, पूरी कुंडली साथ पढ़ी जाती है।
विवाह और मिलान
मेष राशि वाले प्रेम भी उसी तरह करते हैं जैसे बाकी सब: खुलकर और पहल करके। उन्हें ऐसा साथी भाता है जो सीधी बात करे और मन की बात छुपाए नहीं।
गुण मिलान में भकूट कूट दोनों की चंद्र राशियों की दूरी देखता है। मेष से गिनें तो एक ही राशि और 3/11, 4/10, 1/7 की दूरी वाली राशियाँ (मेष, मिथुन, कुंभ, कर्क, मकर, तुला) पूरे सात अंक पाती हैं। वृषभ और मीन (2/12), सिंह और धनु (5/9), तथा कन्या और वृश्चिक (6/8) पर शून्य अंक मिलते हैं, जब तक कोई अपवाद लागू न हो। कई परंपराएँ दोनों राशियों का स्वामी एक होने या स्वामियों में मित्रता होने पर यह दोष हटा देती हैं; इसी नियम से मेष और वृश्चिक, जिनका स्वामी मंगल ही है, अक्सर छूट पाते हैं। असली मिलान नक्षत्र और दोनों पूरी कुंडलियों से होता है; आठों कूटों का विवरण गुण मिलान लेख में है।
कार्यक्षेत्र की प्रवृत्तियाँ
ये प्रवृत्तियाँ हैं, गारंटी नहीं। मेष की ऊर्जा ऐसे काम में खिलती है जहाँ चुनौती साफ़ हो और नतीजा दिखे। वर्दी वाली सेवाएँ, खेल, शल्य चिकित्सा और आपात सेवाएँ, इंजीनियरिंग, अपना उद्यम, किसी नई चीज़ की शुरुआत, ये पारंपरिक संबंध हैं। करियर असल में दशम भाव, उसके स्वामी और चल रही दशा से बनता है; राशि यह बताती है कि आप काम कैसे करते हैं, यह कम कि क्या करते हैं।
मेष लग्न और मेष राशि में अंतर
मेष लग्न में मंगल पहले और आठवें दोनों भावों का स्वामी होता है, यानी शरीर और स्वयं के साथ जीवन का छिपा, रूपांतरण वाला पक्ष भी उसी के हाथ में है। सूर्य पंचम का स्वामी बनता है और गुरु नवम तथा द्वादश का, इसलिए इस लग्न के लिए सूर्य और गुरु सामान्यतः सहायक माने जाते हैं। मेष लग्न शरीर और जीवन के प्रति रवैये में दिखता है: सीधा व्यवहार, तुरंत कदम उठाने की तैयारी।
मेष राशि (चंद्रमा) भीतर का मौसम बताती है: किस बात से उत्साह आता है, मन कितनी जल्दी बदलता है, सुरक्षित महसूस करने के लिए क्या चाहिए। किसी का लग्न शांत कर्क हो और चंद्रमा मेष में, तो वह बाहर से स्थिर दिख सकता है पर भीतर से अधीर।
उच्च और नीच ग्रह
सूर्य मेष में उच्च का होता है, परम उच्च 10° पर; जहाँ पहल को सम्मान मिले वहाँ अधिकार और प्राण-शक्ति खिलते हैं। शनि यहाँ नीच का है, परम नीच 20° पर, क्योंकि धीमा धैर्य तेज़ अग्नि राशि में असहज रहता है। नीच ग्रह कोई अंतिम फ़ैसला नहीं; नीचभंग के नियम अक्सर उसे उठा देते हैं, और भाव व स्वामित्व के हिसाब से वह अच्छे फल भी दे सकता है। राशि-स्वामी मंगल की मूलत्रिकोण राशि यहीं पहले 12° में है। राहु-केतु की मेष में कोई सर्वमान्य उच्च-नीच स्थिति शास्त्रों में नहीं है।
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इस राशि का दैनिक और मासिक फल मेष राशिफल पर है। बारहों राशियों के तत्व और स्वभाव एक साथ समझने के लिए राशियों का परिचय देखें, और अगली राशि वृषभ पढ़कर जानें कि अगले 30 अंश कितने अलग हैं।