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ग्रहण 2027: पाँचों ग्रहण, भारत में समय और सूतक

ग्रहण 2027 में कुल पाँच ग्रहण, भारत में साफ़ दिखेगा केवल 2 अगस्त का सूर्य ग्रहण। शहरवार समय, सूतक कब से, और किन ग्रहणों में सूतक नहीं लगेगा, पूरी जानकारी।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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इस लेख में

साल 2027 में कुल पाँच ग्रहण हैं, लेकिन भारत के लिए साफ़ तौर पर देखने लायक केवल एक है: सोमवार, 2 अगस्त 2027 का पूर्ण सूर्य ग्रहण, जो भारत के हर शहर में दोपहर बाद आंशिक (खंडग्रास) रूप में दिखेगा (दिल्ली में 3:53 से 5:02 बजे तक)। बाकी चार ग्रहण या तो भारत में दिखेंगे ही नहीं (6 फ़रवरी और 17 अगस्त), या ऐसे हल्के उपच्छाया चंद्र ग्रहण हैं जिन्हें आम आदमी पहचान भी नहीं पाएगा (21 फ़रवरी और 18 जुलाई), और इन चारों में से किसी का सूतक भारत में नहीं लगेगा।

नीचे हर ग्रहण की तारीख, बड़े शहरों का समय, ग्रहण के समय सूर्य-चंद्र की राशि और नक्षत्र, और सूतक का नियम सरल शब्दों में दिया गया है। 2027 में "सूतक लगेगा या नहीं" का सवाल कई बार उठेगा, इसलिए यह हिस्सा ध्यान से पढ़ें। यहाँ हर समय हमारे अपने ग्रहण-गणना इंजन से है, भारतीय समय में।

2027 के पाँचों ग्रहण एक नज़र में

तारीखग्रहण का प्रकारभारत में दिखेगा?ग्रहण का मध्य (भारतीय समय)राशि, नक्षत्रभारत में सूतक
शनिवार 6 फ़रवरी 2027वलयाकार सूर्य ग्रहणनहीं (रात)रात 9:29सूर्य मकर में, धनिष्ठानहीं
रविवार 21 फ़रवरी 2027उपच्छाया चंद्र ग्रहणहाँ, पर बहुत हल्कातड़के 4:42चंद्र सिंह में, मघानहीं
रविवार 18 जुलाई 2027उपच्छाया चंद्र ग्रहणकागज़ पर हाँ, आँख से नहींरात 9:32चंद्र मकर में, उत्तराषाढ़ानहीं
सोमवार 2 अगस्त 2027पूर्ण सूर्य ग्रहणहाँ, आंशिक रूप मेंदोपहर 3:36 (वैश्विक)सूर्य कर्क में, पुष्यहाँ, स्थानीय स्पर्श से 12 घंटे पहले
मंगलवार 17 अगस्त 2027उपच्छाया चंद्र ग्रहणनहीं (दिन)दोपहर 12:43चंद्र मकर में, धनिष्ठानहीं

हर ग्रहण का पूरा ब्योरा उसके अपने पेज पर है: 2027 के सभी ग्रहण, और अलग-अलग पेज 2 अगस्त, 6 फ़रवरी, 21 फ़रवरी, 18 जुलाई और 17 अगस्त।

2 अगस्त 2027: साल का सबसे बड़ा ग्रहण

पूरी पृथ्वी के हिसाब से यह एक लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण है: पृथ्वी पर कहीं न कहीं ग्रहण दोपहर 1:00 बजे (भारतीय समय) शुरू होकर शाम 6:13 बजे तक चलेगा, और इसका मध्य 3:36 बजे है। चंद्रमा की गहरी छाया भारत से होकर नहीं गुज़रती, इसलिए भारत में कहीं भी सूर्य पूरा नहीं ढकेगा। भारत में दिखेगा खंडग्रास ग्रहण, यानी सूर्य का एक हिस्सा कटा हुआ, दोपहर बाद।

सूर्य कितना ढकेगा, यह आपके शहर पर बहुत निर्भर है। दक्षिण और पश्चिम भारत में ग्रहण गहरा और लंबा है; उत्तर और पूर्व में हल्का और छोटा।

शहरग्रहण शुरू (स्पर्श)मध्यसमाप्त (मोक्ष)अवधिमध्य में सूर्य का ढका व्यास
बेंगलुरु3:584:535:43104 मिनट49%
चेन्नई4:024:545:4199 मिनट45%
मुंबई3:474:415:31104 मिनट43%
पुणे3:494:435:32103 मिनट42%
हैदराबाद3:584:475:3395 मिनट38%
अहमदाबाद3:444:355:2197 मिनट35%
भोपाल3:544:385:1884 मिनट27%
जयपुर3:504:315:0979 मिनट22%
दिल्ली3:534:295:0269 मिनट17%
वाराणसी4:054:375:0863 मिनट15%
लखनऊ4:014:345:0564 मिनट15%
कोलकाता4:144:445:1258 मिनट14%
पटना4:104:385:0555 मिनट12%
गुवाहाटी4:264:394:5226 मिनट3%

(सभी समय दोपहर/शाम के हैं।) "ढका व्यास" को ग्रहण का परिमाण (मैग्निट्यूड) कहते हैं: स्थानीय मध्य के समय सूर्य के व्यास का कितना हिस्सा चंद्रमा के पीछे है। दिल्ली में 17% का मतलब है एक छोटा-सा कटाव; बेंगलुरु में लगभग आधा व्यास। गुवाहाटी में यह केवल 26 मिनट की हल्की-सी झलक है।

किसी भी धार्मिक नियम से पहले यह नियम ज़रूरी है: सूर्य को कभी भी सीधे, साधारण धूप के चश्मे, कैमरे या दूरबीन से न देखें। प्रमाणित ग्रहण-चश्मा इस्तेमाल करें या छवि को कागज़ पर उतारें (कार्ड में छोटा-सा छेद करके)। खंडग्रास ग्रहण में रोशनी कभी इतनी कम नहीं होती कि सीधे देखना सुरक्षित हो।

2 अगस्त का सूतक, शहरवार

उत्तर भारत के अधिकतर घरों में मानी जाने वाली परंपरा के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक अपने शहर में ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लगता है और ग्रहण समाप्त होते ही खत्म होता है। स्पर्श का समय शहर के हिसाब से बदलता है, इसलिए सूतक भी:

शहरसूतक शुरू (सुबह)सूतक समाप्त (ग्रहण का मोक्ष)
अहमदाबाद3:44शाम 5:21
मुंबई3:47शाम 5:31
पुणे3:49शाम 5:32
जयपुर3:50शाम 5:09
दिल्ली3:53शाम 5:02
भोपाल3:54शाम 5:18
बेंगलुरु3:58शाम 5:43
हैदराबाद3:58शाम 5:33
लखनऊ4:01शाम 5:05
चेन्नई4:02शाम 5:41
वाराणसी4:05शाम 5:08
पटना4:10शाम 5:05
कोलकाता4:14शाम 5:12
गुवाहाटी4:26शाम 4:52

2 अगस्त 2027 के ग्रहण पेज पर हमारे सभी 28 शहरों का समय है। आपका शहर सूची में न हो, तो पास का बड़ा शहर आम तौर पर कुछ ही मिनट के अंतर पर होता है।

चंद्र ग्रहण: "दिखेगा" का मतलब हमेशा "दिखेगा" नहीं

2027 के तीनों चंद्र ग्रहण उपच्छाया (पेनुम्ब्रल) हैं। ऐसे ग्रहण में चंद्रमा केवल पृथ्वी की बाहरी, हल्की छाया से गुज़रता है, गहरी छाया (प्रच्छाया) में जाता ही नहीं। चंद्रमा न लाल होता है, न उसमें कोई कटाव दिखता है; ज़्यादा से ज़्यादा एक किनारा थोड़ा धुंधला लगता है।

  • 21 फ़रवरी 2027, तड़के 2:42 से सुबह 6:43 तक, मध्य 4:42 बजे, चंद्रमा सिंह राशि (मघा) में। उपच्छाया परिमाण 0.93 है, इसलिए ध्यान से देखने वाले को 4:42 बजे (ग्रहण के मध्य) के आसपास चंद्रमा का एक हिस्सा थोड़ा मटमैला दिख सकता है। पूर्वी शहरों में चंद्रमा ग्रहण खत्म होने से पहले अस्त हो जाता है: कोलकाता में दिखने वाला हिस्सा 6:06 बजे, पटना में 6:21 और गुवाहाटी में 5:55 बजे खत्म।
  • 18 जुलाई 2027, रात 9:22 से 9:43 तक, चंद्रमा मकर राशि (उत्तराषाढ़ा) में। यह गुरु पूर्णिमा की रात है, इसलिए बहुत से कैलेंडर इसे छापेंगे। इसका उपच्छाया परिमाण केवल 0.005 है: चंद्रमा 21 मिनट तक बाहरी छाया को बस छूकर निकलता है। कागज़ पर यह पूरे भारत में "दृश्य" है, पर व्यवहार में इसे कोई नहीं देख पाएगा।
  • 17 अगस्त 2027, मध्य दोपहर 12:43 बजे: भारत में दिन है, इसलिए यह यहाँ बिलकुल नहीं दिखेगा।

हमारा इंजन उपच्छाया चंद्र ग्रहण पर सूतक नहीं लगाता। चंद्र ग्रहण का पारंपरिक सूतक चंद्रमा के गहरी छाया को छूने से 9 घंटे पहले शुरू होता है, और उपच्छाया ग्रहण में यह स्पर्श होता ही नहीं। कुछ पंचांग और परिवार 21 फ़रवरी या 18 जुलाई को भी सूतक मानेंगे; यह परिवार की अपनी आस्था है, आकाश की कोई बाध्यता नहीं। गुरु पूर्णिमा की तिथि और समय गुरु पूर्णिमा पेज पर देखें।

6 फ़रवरी 2027: वलयाकार ग्रहण जो भारत में नहीं दिखेगा

साल का पहला ग्रहण वलयाकार है, यानी चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाता और चारों ओर एक चमकदार कंगन-सा बचा रहता है। इसका मध्य रात 9:29 बजे है, जब भारत में हर जगह सूर्य क्षितिज के नीचे है। हमारे किसी भी शहर से यह नहीं दिखता, इसलिए भारत में सूतक नहीं लगेगा। खबरों में आप इसका ज़िक्र ज़रूर पढ़ेंगे, क्योंकि यह दुनिया के दूसरे हिस्सों में दिखेगा।

सूतक, सीधी भाषा में

सूतक ग्रहण से पहले का वह पारंपरिक समय है जिसमें मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और बहुत से घरों में खाना बनाना-खाना और शुभ काम रोके जाते हैं। मुहूर्त चिंतामणि और धर्मसिंधु जैसे ग्रंथों में दिया गया प्रचलित नियम तीन बातों का है:

  1. सूर्य ग्रहण: अपने स्थान पर ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक।
  2. चंद्र ग्रहण: चंद्रमा के गहरी छाया को छूने से 9 घंटे पहले सूतक।
  3. केवल वहीं जहाँ ग्रहण दिखे। जहाँ से ग्रहण दिखाई ही न दे, वहाँ सूतक नहीं।

तीसरी बात ही सबसे अधिक भुला दी जाती है, खासकर फ़ॉरवर्ड किए गए संदेशों में। इसी कारण 2 अगस्त का सूतक भारत में लगेगा, 6 फ़रवरी का नहीं। परंपरा बच्चों, बुज़ुर्गों, बीमारों और गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक के नियमों में छूट भी देती है; गर्भावस्था में तो डॉक्टर की सलाह सबसे पहले है, पारंपरिक नियम अपनी इच्छा से।

ज्योतिष में ग्रहण, शांति से

2 अगस्त का सूर्य ग्रहण तब है जब सूर्य कर्क राशि में, पुष्य नक्षत्र में है, और राहु-केतु मकर और कर्क में हैं (देखें राहु-केतु गोचर)। परंपरा ग्रहण को शांत बैठने का समय मानती है: प्रार्थना, जप, दान और ग्रहण के बाद स्नान। यह डरने का कारण नहीं है, और इसे "ठीक करने" के लिए कुछ खरीदने की ज़रूरत नहीं। अगर ग्रहण आपकी चंद्र राशि या जन्म नक्षत्र पर पड़ रहा हो, तो परंपरा उसे नोट करती है, पर उसका असर आपकी पूरी कुंडली और चल रही दशा के साथ पढ़ा जाता है, अकेले नहीं। जन्म कुंडली वाले पक्ष पर हमारा लेख ग्रहण दोष पढ़ें।

साल की दूसरी बड़ी घटनाएँ, गुरु का सिंह और कर्क के बीच आना-जाना और 3 जून 2027 को शनि का मेष में प्रवेश, हमारे राशिफल 2027 लेख में हैं।

दूसरी सूचियों से अंतर क्यों

  • वैश्विक बनाम स्थानीय समय। बहुत-सी सूचियाँ पूरी पृथ्वी का शुरू और अंत (2 अगस्त को 1:00 से 6:13) देती हैं। आपके शहर में उसका केवल एक हिस्सा दिखता है; हम वही स्थानीय हिस्सा दिखाते हैं।
  • उपच्छाया ग्रहण। कुछ सूचियाँ इन्हें पूरे ग्रहण की तरह सूतक सहित छापती हैं, कुछ इन्हें छोड़ देती हैं। हम इन्हें सूची में रखते हैं और साफ़ लिखते हैं कि इनमें सूतक नहीं है और ये हल्के या अदृश्य हैं।
  • गोलाई और शहर का बिंदु। एक-दो मिनट का अंतर आम तौर पर शहर के अक्षांश-देशांतर के अलग बिंदु से आता है।

खुद देखें

हर ग्रहण के सभी समय ग्रहण 2027 सूची में हैं, और 2 अगस्त का पेज सभी 28 शहरों का समय देता है। अपने शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त और उस दिन की तिथि पंचांग में देखें, और ग्रहण आपकी चंद्र राशि या नक्षत्र पर है या नहीं, यह मुफ़्त कुंडली बताती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में कितने ग्रहण हैं?

कुल पाँच: 6 फ़रवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण, 21 फ़रवरी, 18 जुलाई और 17 अगस्त को उपच्छाया चंद्र ग्रहण, और 2 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण। भारत में साफ़ दिखने वाला केवल 2 अगस्त का सूर्य ग्रहण है।

क्या 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा?

हाँ, आंशिक (खंडग्रास) रूप में, हमारे गणना वाले सभी 28 शहरों में, दोपहर बाद। पूर्णता भारत से नहीं दिखेगी। दिल्ली में ग्रहण दोपहर 3:53 से शाम 5:02 तक रहेगा और सूर्य के व्यास का लगभग 17% ढकेगा; मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में इससे कहीं अधिक।

2 अगस्त 2027 के ग्रहण का सूतक कब से लगेगा?

परंपरा में सूर्य ग्रहण का सूतक अपने शहर में ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लगता है, इसलिए हर शहर में समय थोड़ा अलग है: दिल्ली में सुबह 3:53, मुंबई में 3:47 और कोलकाता में 4:14 से, और ग्रहण समाप्त होने पर सूतक भी समाप्त।

क्या उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक लगता है?

हमारे पंचांग में उपच्छाया (पेनुम्ब्रल) चंद्र ग्रहण पर सूतक नहीं माना जाता, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश ही नहीं करता। प्रचलित मत भी यही है, हालाँकि कुछ परिवार फिर भी सूतक मानते हैं।

6 फ़रवरी 2027 के सूर्य ग्रहण का सूतक भारत में लगेगा?

नहीं। यह ग्रहण भारत में रात के समय (मध्य रात 9:29 बजे) है, इसलिए यहाँ दिखाई नहीं देगा और भारत में इसका सूतक नहीं लगेगा।

स्वयं आज़माएँ

स्रोत

  • सतमार्ग ज्योतिष का अपना गणना इंजन (लाहिड़ी अयनांश, भारतीय समय): ग्रहण के स्पर्श-मोक्ष, प्रकार और 28 भारतीय शहरों के स्थानीय समय, स्विस एफ़ेमेरिस से जाँचे गए
  • मुहूर्त चिंतामणि और धर्मसिंधु (सूतक की परंपरा: सूर्य ग्रहण में 12 घंटे और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पहले, केवल जहाँ ग्रहण दिखे)

यह लेख सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने लिखा है। तिथियाँ और अंश हमारे अपने इंजन से (लाहिड़ी अयनांश)। ज्योतिष विचार के लिए मार्गदर्शन है — चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति

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