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मुहूर्त · अक्टूबर 2027

भूमि पूजन मुहूर्त अक्टूबर 2027

अक्टूबर 2027 में भूमि पूजन का कोई मुहूर्त नहीं (नई दिल्ली, दिल्ली, भारत)। चातुर्मास पूरे माह।

अक्टूबर 2027: हर दिन का निर्णय

दिनसूर्योदय परनिर्णय
1 अक्टूबरशुक्रवारशुक्ल द्वितीयाचित्रा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
2 अक्टूबरशनिवारशुक्ल तृतीयास्वाति
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
3 अक्टूबररविवारशुक्ल चतुर्थीविशाखा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
4 अक्टूबरसोमवारशुक्ल पंचमीअनुराधा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
5 अक्टूबरमंगलवारशुक्ल षष्ठीज्येष्ठा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
6 अक्टूबरबुधवारशुक्ल सप्तमीमूल
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
7 अक्टूबरगुरुवारशुक्ल अष्टमीपूर्वाषाढ़ा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
8 अक्टूबरशुक्रवारशुक्ल अष्टमीपूर्वाषाढ़ा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
9 अक्टूबरशनिवारशुक्ल नवमीउत्तराषाढ़ा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
10 अक्टूबररविवारशुक्ल दशमीश्रवण
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
11 अक्टूबरसोमवारशुक्ल एकादशीधनिष्ठा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
12 अक्टूबरमंगलवारशुक्ल द्वादशीशतभिषा
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
13 अक्टूबरबुधवारशुक्ल त्रयोदशीपूर्वा भाद्रपद
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
14 अक्टूबरगुरुवारशुक्ल चतुर्दशीउत्तरा भाद्रपद
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
15 अक्टूबरशुक्रवारपूर्णिमारेवती
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
16 अक्टूबरशनिवारकृष्ण प्रतिपदाअश्विनी
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
17 अक्टूबररविवारकृष्ण द्वितीयाभरणी
  • सूर्य कन्या राशि में हैं; भूमि पूजन केवल तब होता है जब सूर्य मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ में हों।
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
18 अक्टूबरसोमवारकृष्ण तृतीयाकृत्तिका
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
19 अक्टूबरमंगलवारकृष्ण चतुर्थीरोहिणी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
20 अक्टूबरबुधवारकृष्ण पंचमीमृगशिरा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
21 अक्टूबरगुरुवारकृष्ण षष्ठीआर्द्रा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
22 अक्टूबरशुक्रवारकृष्ण सप्तमीपुनर्वसु
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
23 अक्टूबरशनिवारकृष्ण अष्टमीपुष्य
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
24 अक्टूबररविवारकृष्ण नवमीआश्लेषा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
25 अक्टूबरसोमवारकृष्ण एकादशीमघा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
26 अक्टूबरमंगलवारकृष्ण द्वादशीपूर्वा फाल्गुनी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
27 अक्टूबरबुधवारकृष्ण त्रयोदशीउत्तरा फाल्गुनी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
28 अक्टूबरगुरुवारकृष्ण चतुर्दशीहस्त
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
29 अक्टूबरशुक्रवारअमावस्याचित्रा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
30 अक्टूबरशनिवारशुक्ल प्रतिपदास्वाति
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
31 अक्टूबररविवारशुक्ल द्वितीयाविशाखा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार भूमि पूजन के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।

हमारे नियम

नक्षत्र
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा
तिथि
शुक्ल 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 13; कृष्ण 2, 3, 5
वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
टाले जाते हैं
राहु काल, यमगण्ड, विष्टि (भद्रा) करण, व्यतीपात / वैधृति योग, रात्रि
पूरे दिन छोड़े जाते हैं
अनुपयुक्त सौर मास, खरमास, चातुर्मास, अधिक मास, गुरु अस्त, शुक्र अस्त
सूर्य इन राशियों में हों
मेष, वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ
भूमि पूजन मुहूर्त: पूरी जानकारी और प्रश्न

ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं