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मुहूर्त · अगस्त 2027

कर्णवेध मुहूर्त अगस्त 2027

अगस्त 2027 में कर्णवेध का कोई मुहूर्त नहीं (नई दिल्ली, दिल्ली, भारत)। चातुर्मास पूरे माह।

अगस्त 2027: हर दिन का निर्णय

दिनसूर्योदय परनिर्णय
1 अगस्तरविवारकृष्ण चतुर्दशीपुनर्वसु
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
2 अगस्तसोमवारअमावस्यापुष्य
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
3 अगस्तमंगलवारशुक्ल प्रतिपदाआश्लेषा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
4 अगस्तबुधवारशुक्ल द्वितीयामघा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
5 अगस्तगुरुवारशुक्ल चतुर्थीपूर्वा फाल्गुनी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
6 अगस्तशुक्रवारशुक्ल पंचमीउत्तरा फाल्गुनी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
7 अगस्तशनिवारशुक्ल षष्ठीहस्त
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
8 अगस्तरविवारशुक्ल सप्तमीचित्रा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
9 अगस्तसोमवारशुक्ल अष्टमीस्वाति
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
10 अगस्तमंगलवारशुक्ल नवमीविशाखा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
11 अगस्तबुधवारशुक्ल दशमीअनुराधा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
12 अगस्तगुरुवारशुक्ल एकादशीज्येष्ठा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
13 अगस्तशुक्रवारशुक्ल द्वादशीमूल
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
14 अगस्तशनिवारशुक्ल त्रयोदशीपूर्वाषाढ़ा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
15 अगस्तरविवारशुक्ल त्रयोदशीउत्तराषाढ़ा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
16 अगस्तसोमवारशुक्ल चतुर्दशीश्रवण
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
17 अगस्तमंगलवारपूर्णिमाधनिष्ठा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
18 अगस्तबुधवारकृष्ण प्रतिपदाशतभिषा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
19 अगस्तगुरुवारकृष्ण द्वितीयापूर्वा भाद्रपद
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
20 अगस्तशुक्रवारकृष्ण तृतीयापूर्वा भाद्रपद
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
21 अगस्तशनिवारकृष्ण चतुर्थीउत्तरा भाद्रपद
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
22 अगस्तरविवारकृष्ण पंचमीरेवती
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
23 अगस्तसोमवारकृष्ण षष्ठीअश्विनी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
24 अगस्तमंगलवारकृष्ण सप्तमीभरणी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
25 अगस्तबुधवारकृष्ण अष्टमीकृत्तिका
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
26 अगस्तगुरुवारकृष्ण नवमीरोहिणी
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
27 अगस्तशुक्रवारकृष्ण दशमीमृगशिरा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
28 अगस्तशनिवारकृष्ण एकादशीआर्द्रा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
29 अगस्तरविवारकृष्ण द्वादशीपुनर्वसु
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
30 अगस्तसोमवारकृष्ण त्रयोदशीआश्लेषा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
31 अगस्तमंगलवारअमावस्यामघा
  • चातुर्मास: देवशयनी से देवउठनी एकादशी के बीच।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।

हमारे नियम

नक्षत्र
अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती
तिथि
शुक्ल 1, 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13; कृष्ण 1, 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13; पूर्णिमा
वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
टाले जाते हैं
राहु काल, विष्टि (भद्रा) करण, रात्रि
पूरे दिन छोड़े जाते हैं
खरमास, चातुर्मास, अधिक मास
कर्णवेध मुहूर्त: पूरी जानकारी और प्रश्न

ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं