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मुहूर्त · दिसंबर 2027

कर्णवेध मुहूर्त दिसंबर 2027

दिसंबर 2027 के 31 में से 6 दिन कर्णवेध के लिए शुभ हैं (नई दिल्ली)। नीचे हर दिन है: शुभ दिन समय सहित, बाक़ी दिन उस नियम के साथ जो उन्हें रोकता है।

दिसंबर 2027: हर दिन का निर्णय

दिनसूर्योदय परनिर्णय
1 दिसंबरबुधवारशुक्ल तृतीयापूर्वाषाढ़ा
  • चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में — कर्णवेध के अनुकूल नक्षत्र नहीं।
2 दिसंबरगुरुवारशुक्ल चतुर्थीउत्तराषाढ़ा
  • चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में — कर्णवेध के अनुकूल नक्षत्र नहीं।
3 दिसंबरशुक्रवारशुक्ल पंचमीश्रवण
  • 06:57 – 10:523 घं 55 मि · शुक्ल पंचमी · श्रवण
  • 12:10 – 16:134 घं 3 मि · शुक्ल पंचमी · श्रवण
  • 16:13 – 17:231 घं 10 मि · शुक्ल षष्ठी · श्रवण
4 दिसंबरशनिवारशुक्ल षष्ठीधनिष्ठा
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
5 दिसंबररविवारशुक्ल सप्तमीधनिष्ठा
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
6 दिसंबरसोमवारशुक्ल अष्टमीशतभिषा
  • तिथि शुक्ल अष्टमी — कर्णवेध के लिए प्रयुक्त तिथि नहीं।
  • चंद्रमा शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में — कर्णवेध के अनुकूल नक्षत्र नहीं।
7 दिसंबरमंगलवारशुक्ल नवमीपूर्वा भाद्रपद
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
8 दिसंबरबुधवारशुक्ल दशमीउत्तरा भाद्रपद
  • 16:13 – 17:241 घं 11 मि · शुक्ल दशमी · रेवती
9 दिसंबरगुरुवारशुक्ल एकादशीरेवती
  • 07:01 – 13:316 घं 29 मि · शुक्ल एकादशी · रेवती
  • 14:48 – 15:1527 मि · शुक्ल एकादशी · रेवती
10 दिसंबरशुक्रवारशुक्ल द्वादशीअश्विनी
  • 07:02 – 10:553 घं 53 मि · शुक्ल द्वादशी · अश्विनी
  • 12:13 – 15:122 घं 59 मि · शुक्ल द्वादशी · अश्विनी
  • 15:12 – 17:242 घं 12 मि · शुक्ल द्वादशी · अश्विनी
11 दिसंबरशनिवारशुक्ल त्रयोदशीभरणी
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
12 दिसंबररविवारशुक्ल चतुर्दशीकृत्तिका
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
13 दिसंबरसोमवारपूर्णिमारोहिणी
  • 15:14 – 17:252 घं 11 मि · पूर्णिमा · मृगशिरा
14 दिसंबरमंगलवारकृष्ण प्रतिपदामृगशिरा
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
15 दिसंबरबुधवारकृष्ण द्वितीयाआर्द्रा
  • 11:21 – 12:1554 मि · कृष्ण द्वितीया · पुनर्वसु
  • 13:33 – 16:132 घं 40 मि · कृष्ण द्वितीया · पुनर्वसु
  • 16:13 – 17:261 घं 13 मि · कृष्ण तृतीया · पुनर्वसु
16 दिसंबरगुरुवारकृष्ण तृतीयापुनर्वसु
  • जहाँ तिथि और नक्षत्र मिलते हैं, वह समय विष्टि (भद्रा) करण में पड़ता है।
17 दिसंबरशुक्रवारकृष्ण चतुर्थीपुष्य
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
18 दिसंबरशनिवारकृष्ण पंचमीमघा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
19 दिसंबररविवारकृष्ण सप्तमीपूर्वा फाल्गुनी
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
20 दिसंबरसोमवारकृष्ण अष्टमीउत्तरा फाल्गुनी
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
21 दिसंबरमंगलवारकृष्ण नवमीहस्त
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
22 दिसंबरबुधवारकृष्ण दशमीचित्रा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
23 दिसंबरगुरुवारकृष्ण एकादशीस्वाति
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
24 दिसंबरशुक्रवारकृष्ण द्वादशीविशाखा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
25 दिसंबरशनिवारकृष्ण त्रयोदशीअनुराधा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • शनिवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
26 दिसंबररविवारकृष्ण चतुर्दशीज्येष्ठा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • रविवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
27 दिसंबरसोमवारअमावस्यामूल
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
28 दिसंबरमंगलवारशुक्ल प्रतिपदापूर्वाषाढ़ा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
  • मंगलवार कर्णवेध के लिए प्रयुक्त वार नहीं है।
29 दिसंबरबुधवारशुक्ल द्वितीयापूर्वाषाढ़ा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
30 दिसंबरगुरुवारशुक्ल तृतीयाउत्तराषाढ़ा
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।
31 दिसंबरशुक्रवारशुक्ल तृतीयाश्रवण
  • खरमास: सूर्य धनु राशि में हैं।

बाक़ी दिनों के मुख्य कारण: खरमास (15), अनुपयुक्त वार (12), अनुकूल नक्षत्र नहीं (3), अनुपयुक्त तिथि (1)

हमारे नियम

नक्षत्र
अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती
तिथि
शुक्ल 1, 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13; कृष्ण 1, 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13; पूर्णिमा
वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
टाले जाते हैं
राहु काल, विष्टि (भद्रा) करण, रात्रि
पूरे दिन छोड़े जाते हैं
खरमास, चातुर्मास, अधिक मास
कर्णवेध मुहूर्त: पूरी जानकारी और प्रश्न

ये तिथियाँ हमारे अपने इंजन से, खुले नियमों पर निकली हैं — कोई AI नहीं। हम लग्न शुद्धि, व्यक्तिगत तारा/चंद्र बल, पंचक और क्षेत्रीय प्रथाएँ नहीं देखते, और नियम कई परंपराओं का साझा, सख़्त भाग हैं; इसलिए कुछ पंचांगों की कुछ तिथियाँ यहाँ नहीं होंगी। अंतिम निर्णय से पहले अपने पुरोहित से पूछ लें। हम मुहूर्त कैसे निकालते हैं