वैदिक (निरयण) ज्योतिष में सूर्य लगभग 14–15 मई से 14–15 जून तक वृषभ राशि में रहता है; पश्चिमी सायन पद्धति का "वृषभ सूर्य" एक अलग अवधि है, 19–20 अप्रैल से 20–21 मई तक। इसलिए जो लोग पत्रिकाओं में अपना राशिफल वृषभ पढ़ते हैं, उनमें से कई का सूर्य निरयण मेष में होता है, और वैदिक वृषभ का सूर्य अधिकतर पश्चिमी मिथुन वालों का है। इस राशि में सूर्य अपने शत्रु शुक्र के घर में है: इच्छाशक्ति और अधिकार का ग्रह पृथ्वी, मूल्य और धैर्य की चाल से चलना सीखता हुआ।
वृषभ में सूर्य का स्वभाव
वृषभ पृथ्वी तत्व की, स्थिर, सम और स्त्री राशि है, स्वामी शुक्र, प्रतीक बैल। कालपुरुष में यह दूसरी राशि है, यानी मुख, वाणी, कुटुंब और संचित धन की राशि। सूर्य चमकना और दिशा देना चाहता है; वृषभ टिकना, सहेजना और आनंद लेना चाहता है। यह मेल शत्रुता से अधिक धीमेपन का है।
कुंडली में यह प्रायः ऐसे दिखता है:
- स्थिरता। एक बार निर्णय हो गया तो उसे हिलाना कठिन। अधिकार धावा बोलकर नहीं, पकड़कर रखा जाता है।
- मूल्य ही पहचान। आत्मसम्मान इस बात से जुड़ जाता है कि व्यक्ति के पास क्या है, वह क्या कमाता है, किस बात पर अडिग है, और उसके कुल का नाम क्या है।
- तौलकर बोली गई बात। मुख और वाणी की राशि में सूर्य शब्दों को वज़न देता है; दबाव में वही अड़ियल राय बन सकती है।
- रुचि और सुख। शुक्र की राशि गुणवत्ता की परख देती है, भले ही सूर्य यह मानना न चाहे कि उसे इसकी परवाह है।
परंपरा वृषभ को मुख और कंठ से जोड़ती है। यह प्रतीकात्मक संबंध है, किसी के स्वास्थ्य के बारे में कथन नहीं।
बल: शत्रु की राशि
पूरे 30 अंश तक वृषभ सूर्य के लिए शत्रु राशि है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र शुक्र और शनि को सूर्य के नैसर्गिक शत्रु बताता है, और यहाँ अरुचि दोनों ओर से है: सूर्य शुक्र को शत्रु मानता है और शुक्र सूर्य को। यह नीच अवस्था नहीं है, जो सूर्य के लिए केवल तुला में होती है, पर यह उन तीन राशियों (मकर और कुंभ के साथ) में से है जहाँ सूर्य सबसे कम सहज रहता है।
व्यवहार में इसका अर्थ बहुत कुछ शुक्र पर टिका है। बली और अच्छी अवस्था का शुक्र सूर्य को सुरक्षित मेज़बान देता है, भले दोनों मित्र न हों; पीड़ित शुक्र सूर्य के फल को कठिन बनाता है। आपकी अपनी कुंडली में दोनों का तात्कालिक संबंध, जो उनके एक-दूसरे से भाव पर आधारित है, इस नैसर्गिक शत्रुता को नरम या तीखा कर सकता है। शुक्र आकाश में सूर्य से कभी बहुत दूर नहीं जाता, इसलिए दोनों अक्सर पास होते हैं, और उसी राशि का शुक्र अस्त भी हो सकता है।
तीन नक्षत्र, तीन रंग
- कृत्तिका, चरण 2–4 (0°–10°, स्वामी सूर्य): सूर्य अपने ही नक्षत्र में, इसलिए राशि के इस हिस्से में अधिक अग्नि और सीधापन। धार वाली महत्वाकांक्षा।
- रोहिणी (10°–23°20′, स्वामी चंद्र): चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र, उर्वर और आकर्षक। चंद्र सूर्य का मित्र है, इसलिए यहाँ सूर्य में गर्मजोशी, सृजन और सुंदर वस्तुओं से प्रेम झलकता है।
- मृगशिरा, चरण 1–2 (23°20′–30°, स्वामी मंगल): खोजी और बेचैन। मंगल, एक और मित्र, जिज्ञासा और कुछ बेहतर ढूँढ़ने की तत्परता देता है।
कौन-सा भाव? यह लग्न से तय होता है
- वृषभ लग्न: प्रथम भाव, सूर्य चतुर्थ का स्वामी। घर, माता और भीतरी सुरक्षा पहचान का हिस्सा बनते हैं।
- मेष लग्न: द्वितीय भाव, इस राशि का स्वाभाविक भाव, और पंचमेश यहाँ; कुटुंब, वाणी और बचत पर सूर्य की छाप। देखें द्वितीय भाव में सूर्य।
- सिंह लग्न: दशम भाव, जहाँ लग्नेश को दिग्बल मिलता है। शत्रु राशि के बावजूद कर्म का प्रबल संकेत; देखें दशम भाव में सूर्य।
- वृश्चिक लग्न: सप्तम भाव, दशमेश वहाँ, जिससे काम और साझेदारी जुड़ते हैं।
- मकर लग्न: पंचम भाव, अष्टमेश त्रिकोण में।
- कुंभ लग्न: चतुर्थ भाव, सप्तमेश घर में।
वृषभ से सूर्य की एकमात्र पूर्ण दृष्टि सातवीं राशि वृश्चिक पर पड़ती है, जो मंगल की, यानी मित्र की राशि है।
वार्षिक गोचर
वृषभ में सूर्य का गोचर लगभग 31 दिन का होता है और वृषभ संक्रांति से आरंभ होता है। परंपरा से यह नई शुरुआत से अधिक पक्का करने का महीना माना जाता है: धन, भोजन, परिवार और वे काम जिनमें धैर्य चाहिए। निजी असर चंद्र राशि से पढ़ें; चंद्रमा से तीसरा, छठा, दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव सूर्य के लिए सहायक माने जाते हैं। वर्तमान स्थिति और अगला राशि-प्रवेश सूर्य गोचर पृष्ठ पर है।
पद्धतियों का अंतर और आम भूलें
- सायन और निरयण। पश्चिमी ज्योतिष सूर्य को लगभग साढ़े तीन सप्ताह पहले वृषभ में रखता है। दोनों अपने-आप में सुसंगत हैं, पर एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते; देखें वैदिक और पश्चिमी सूर्य राशि और निरयण राशिचक्र।
- "शत्रु राशि" को अभिशाप मान लेना। यह दो सिद्धांतों के बीच खिंचाव बताता है, बुरा जीवन नहीं। बहुत से सफल लोगों का सूर्य यहाँ है।
- पूरी कुंडली को अनदेखा करना। लग्न, सूर्य का स्वामित्व वाला भाव, दृष्टियाँ, युति, नवांश और चल रही दशा, सब फल बदलते हैं।
दोनों ओर की स्थिति से तुलना करें: मेष राशि में सूर्य, जहाँ वह उच्च का है, और मिथुन राशि में सूर्य।
अपनी कुंडली में सूर्य देखें
मुफ़्त कुंडली आपके सूर्य की राशि, भाव, नक्षत्र और बल, साथ में शुक्र की स्थिति भी दिखाती है, ताकि आप परख सकें कि आपके वृषभ में सूर्य वास्तव में कितना सहज है।