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ग्रह · Venus in Taurus

वृषभ राशि में शुक्र: स्वराशि शुक्र और मालव्य योग

वृषभ राशि में शुक्र: अपनी पृथ्वी राशि में शुक्र का बल, कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा, किन लग्नों में मालव्य योग बनता है, वृश्चिक पर दृष्टि और गोचर।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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वृषभ राशि में शुक्र — एक नज़र में

बल (राशि से)
स्वराशि
राशि स्वामी
शुक्र — स्वयं (स्वराशि)
तत्त्व · स्वभाव
पृथ्वी · स्थिर
कालपुरुष भाव
2वाँ भाव (कालपुरुष कुंडली में)
यहाँ के नक्षत्र
कृत्तिका (चरण 2, 3, 4, सूर्य); रोहिणी (चारों चरण, चंद्र); मृगशिरा (चरण 1, 2, मंगल)
इस राशि में ठहराव
लगभग 25 दिन (वक्री होने पर 4 महीने तक)
सूर्य इस राशि में (निरयण)
14–15 मई से 14–15 जूनपश्चिमी (सायन) Taurus: 19–20 अप्रैल से 20–21 मई
महापुरुष योग
मालव्य योग — इन लग्नों में (राशि केंद्र में): वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ

राशियाँ निरयण (लाहिड़ी अयनांश) हैं। ठहराव और तिथियाँ हमारे गणना इंजन से (50 बार के औसत से) हैं; सूर्य की तिथियाँ 2000–2050 के बीच की सबसे पहली और सबसे बाद की तिथि हैं।

इस पृष्ठ पर

वैदिक कुंडली की वृषभ राशि निरयण है, यानी लाहिड़ी अयनांश के सहारे स्थिर तारों से बंधी, और पश्चिमी सायन वृषभ से लगभग 24 अंश पीछे। इसी कारण पश्चिमी चार्ट में "वृषभ में शुक्र" वाले बहुत से लोगों की कुंडली में शुक्र मेष में निकलता है। निरयण वृषभ में शुक्र अपनी ही पृथ्वी राशि में होता है, और यह स्थिति ठहराव, इंद्रिय-सुख और निष्ठा की मानी जाती है: ऐसा शुक्र जो सौंदर्य को छूना, चखना और संभालकर रखना चाहता है।

शुक्र का पार्थिव रूप

शुक्र की दो राशियाँ उसके दो चेहरे दिखाती हैं। वृषभ पृथ्वी तत्व की स्थिर राशि है, सम और स्त्री राशि, कालपुरुष की दूसरी राशि, जिसका अंग मुख, दिशा दक्षिण और प्रतीक बैल है। यहाँ प्रेम, कला, सुख और वाहन के कारक शुक्र का स्वर ठोस और धैर्यवान हो जाता है।

परंपरा इस शुक्र से ये गुण जोड़ती है:

  • टिकाऊ स्नेह। बंधने में समय लगता है और छोड़ने में भी; निष्ठा साल-दर-साल साथ निभाने में दिखती है।
  • इंद्रियों का आनंद। अच्छा भोजन, सुगंध, कपड़े की बनावट, सधी हुई आवाज़। वृषभ मुख की राशि है, इसलिए गायन और मधुर वाणी इसके पुराने संकेत हैं।
  • सुख जोड़ने की आदत। सुंदर घर, बचत और टिकाऊ गुणवत्ता की चीज़ों से लगाव।
  • दबाव में शांति। बैल जल्दबाज़ी नहीं करता; यह धीरज भी लग सकता है और ज़िद भी।
  • छाया पक्ष। अधिकार-भावना, बदलाव से कतराना और कभी-कभी खाने या ख़र्च में अति।

गरिमा: स्वराशि, और मूलत्रिकोण तुला क्यों

वृषभ 0° से 30° तक शुक्र की स्वराशि है। यहाँ मैत्री तालिका की ज़रूरत नहीं, क्योंकि राशि-स्वामी वह स्वयं है; इसलिए उसका बल मुख्यतः भाव, युतियों और अस्त होने पर निर्भर करता है। शुक्र सूर्य से लगभग 47 अंश से अधिक दूर नहीं जाता, इसलिए सूर्य वृषभ में या उससे दो राशि के भीतर होगा, और बहुत पास का सूर्य शुक्र को अस्त कर सकता है।

एक आम भ्रम: शुक्र का मूलत्रिकोण तुला के 0° से 15° तक है, वृषभ में नहीं। वृषभ चंद्र की उच्च और मूलत्रिकोण राशि है। कुछ बाद के ग्रंथ और आचार्य शुक्र की दोनों राशियों को थोड़ा अलग तौलते हैं, पर बृहत् पाराशर होरा शास्त्र पूरे वृषभ को शुक्र की स्वराशि बताता है।

मालव्य योग

जब शुक्र अपनी स्वराशि या उच्च राशि में लग्न से केंद्र (पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव) में हो, तो मालव्य योग बनता है, जो पाँच महापुरुष योगों में से एक है। वृषभ से यह चार लग्नों के लिए बनता है: वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ। परंपरा इसे शालीनता, सुख, वाहन और सुसंस्कृत जीवन से जोड़ती है। इसकी शक्ति अंश, दृष्टि और दशा पर निर्भर रहती है; विस्तार पंच महापुरुष योग लेख में है।

कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा

  • कृत्तिका, दूसरे से चौथे चरण (0°–10°, स्वामी सूर्य): दृढ़ और कुछ स्वाभिमानी शुक्र, रुचि और रिश्तों में ऊँचे मानदंड के साथ।
  • रोहिणी, चारों चरण (10°–23°20′, स्वामी चंद्र): राशि चक्र का सबसे उर्वर और सौंदर्यप्रिय नक्षत्र। यहाँ शुक्र स्नेही, कलात्मक और आकर्षक होता है; चंद्र भावना जोड़ता है, हालाँकि मैत्री तालिका में शुक्र चंद्र को शत्रु मानता है।
  • मृगशिरा, पहले और दूसरे चरण (23°20′–30°, स्वामी मंगल): खोजता हुआ हिरण। संतोषी राशि में यहाँ जिज्ञासा और आदर्श की बेचैन तलाश आ जाती है।

वृश्चिक पर दृष्टि

वृषभ से शुक्र अपनी एकमात्र सातवीं दृष्टि मंगल की राशि वृश्चिक पर डालता है। वृषभ-वृश्चिक की धुरी "जो मेरा है" और "जो हम बाँटते हैं" की धुरी है; इसलिए वृषभ का शुक्र साझेदारी में गहराई और निजता चाहता है।

लग्न के अनुसार कौन सा भाव

वृषभ कालपुरुष का दूसरा भाव है, इसलिए कुटुंब, भोजन, वाणी और बचत के विषयों के लिए द्वितीय भाव में शुक्र पढ़ें। विशेष लग्नों के लिए:

  • वृषभ लग्न: लग्नेश लग्न में, मालव्य योग के साथ; पर यहाँ शुक्र छठे भाव का भी स्वामी है।
  • कुंभ लग्न: योगकारक शुक्र (चौथे और नौवें का स्वामी) चतुर्थ भाव में स्वराशि का होता है, जहाँ दिग्बल और मालव्य योग एक साथ मिलते हैं। अनेक ज्योतिषी इसे शुक्र की सबसे उत्तम स्थितियों में गिनते हैं। देखें चतुर्थ भाव में शुक्र।
  • मकर लग्न: योगकारक पंचम भाव यानी त्रिकोण में: रचनात्मकता, संतान, प्रेम और बुद्धि।
  • वृश्चिक लग्न: सातवें और बारहवें का स्वामी सप्तम में स्वराशि का, मालव्य योग सहित; साझेदारी पर ज़ोर।
  • सिंह लग्न: तीसरे और दसवें का स्वामी दशम में, मालव्य योग के साथ; कला, डिज़ाइन या जनसंपर्क वाले काम में अक्सर दिखता है।
  • तुला लग्न: लग्नेश अष्टम भाव में, निजी और शोधप्रिय स्थिति।

नवांश, दृष्टियाँ और दशा हर पंक्ति को बदल सकती हैं।

वृषभ में शुक्र का गोचर

सामान्य गोचर में शुक्र वृषभ में लगभग 25 दिन रहता है। जब इसी राशि में वक्री हो, तो ठहराव लगभग चार महीने तक खिंच सकता है; साइट के 50 नमूना गोचर 24 दिन से कुछ ऊपर से लेकर लगभग 126 दिन तक रहे। तिथियाँ ऊपर दी गई हैं, और वर्तमान स्थिति शुक्र गोचर पन्ने पर है। गोचर चंद्र राशि से पढ़ा जाता है, प्रायः ऐसे कुछ हफ़्तों के रूप में जब संबंधित भाव में सुख, आनंद और धन के विषय आगे आते हैं।

मतभेद और आम भूलें

  • स्वराशि सहजता की गारंटी नहीं। अस्त या पीड़ित वृषभ का शुक्र भी संघर्ष कर सकता है।
  • वृषभ लग्न में शुक्र षष्ठेश भी है। इसलिए वह व्यक्तित्व के साथ सेवा या विवाद के विषय भी सामने लाता है।
  • पश्चिमी वृषभ का शुक्र अक्सर निरयण मेष में होता है। पढ़ने से पहले जाँच लें। विपरीत राशि के लिए वृश्चिक राशि में शुक्र देखें।

अपनी कुंडली में शुक्र देखें

मुफ़्त कुंडली में शुक्र की राशि, भाव, नक्षत्र और गरिमा दिखती है, और यह भी कि आपके लग्न के लिए मालव्य योग बनता है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वृषभ राशि में शुक्र बलवान होता है?

हाँ। वृषभ के पूरे 30 अंश शुक्र की स्वराशि हैं, इसलिए वह यहाँ अपने घर में है। उसकी मूलत्रिकोण राशि तुला है, वृषभ नहीं। यह बल कितना दिखेगा, यह भाव, दृष्टियों, अस्त होने और दशा पर निर्भर है।

क्या वृषभ का शुक्र मालव्य योग देता है?

केवल तब, जब वृषभ लग्न से केंद्र में हो, यानी वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ लग्न के लिए। बाकी लग्नों में शुक्र स्वराशि में तो रहता है, पर महापुरुष योग नहीं बनता।

वृषभ का शुक्र धन और सुख के बारे में क्या कहता है?

वृषभ कालपुरुष की दूसरी राशि है, जो मुख, भोजन, कुटुंब और संचित धन से जुड़ी है। परंपरा इस शुक्र को अच्छे भोजन, संगीत, सुंदर वस्तुओं और धीरे-धीरे सुख जोड़ने की चाह से जोड़ती है। वास्तविक आर्थिक स्थिति दूसरे और ग्यारहवें भाव से पढ़ी जाती है।

आगे पढ़ें: शुक्र का पूरा परिचय, और वृषभ राशि का स्वभाव।

शुक्र दूसरी राशियों में

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बारह भावों में शुक्र

अपनी कुंडली में देखें

स्रोत

  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने शास्त्रीय ग्रंथों (मुख्यतः बृहत् पाराशर होरा शास्त्र) के आधार पर लिखा है। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ हमने यह स्पष्ट कहा है। ज्योतिष विचार के लिए मार्गदर्शन है — चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति