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नक्षत्र · Uttara Bhadrapada

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: स्वामी, देवता, स्वभाव और चरण

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि में 3°20′ से 16°40′ तक है, स्वामी शनि और देवता अहिर्बुध्न्य। जानिए इसका अर्थ, स्वभाव, मुहूर्त, चारों चरण और नामाक्षर।

  • सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम
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उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र — एक नज़र में

विस्तार (निरयण)
मीन 3°20′–16°40′
राशिचक्र में
333°20′ – 346°40′
स्वामी ग्रह
शनि (19 वर्ष की महादशा)
देवता
अहिर्बुध्न्य, गहरे जल का नाग
प्रतीक
अर्थी के पीछे के पाये, या जुड़वाँ
गण
मनुष्य
योनि
गौ (स्त्री)
नाड़ी
मध्य (पित्त)
मुहूर्त वर्ग
ध्रुव (स्थिर)
नाम अक्षर
दू, थ, झ, ञ
क्रम
27 में 26वाँ

चारों चरण

चरणराशि में अंशनवांश राशिअक्षर
1मीन 3°20′–6°40′सिंहदू
2मीन 6°40′–10°कन्याथ
3मीन 10°–13°20′तुलाझ
4मीन 13°20′–16°40′वृश्चिकञ
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उत्तरा भाद्रपद छब्बीसवाँ नक्षत्र है, जो निरयन राशिचक्र में 333°20′ से 346°40′ तक, यानी मीन राशि के 3°20′ से 16°40′ तक फैला है। इसका स्वामी शनि है, देवता अहिर्बुध्न्य — "गहरे जल के नाग" — हैं, और नाम का अर्थ है "बाद वाले मंगलमय चरण"।

यह भाद्रपद-जोड़ी का शांत दूसरा आधा है, जिसका पहला आधा पूर्वा भाद्रपद है। पहला आधा जहाँ अग्निमय और तीव्र है, उत्तरा भाद्रपद स्थिर, धैर्यवान और गहरा है। यह पूरा मीन राशि में है, जिसका स्वामी गुरु है — इस तरह शनि का अनुशासन गुरु के ज्ञान और करुणा से मिलता है।

अहिर्बुध्न्य: गहराई का नाग

अहिर्बुध्न्य ऋग्वैदिक देवता हैं जो अंतरिक्ष या ब्रह्मांडीय जल के तल में वास करते हैं, और प्रायः अज एकपाद के साथ पुकारे जाते हैं। अज एकपाद जहाँ ऊपर उठता स्तंभ या बिजली की कौंध हैं, वहीं अहिर्बुध्न्य नीचे गहराई में कुंडली मारे बैठा नाग हैं, जो जल को स्थिर थामे रखते हैं। बाद के ग्रंथ इन्हें भी रुद्रों में गिनते हैं।

इस छवि का सार है — छिपी हुई नींव। गहरा पानी ऊपर से शांत दिखता है; विश्राम करता नाग निश्चल है, पर सोया नहीं। इसलिए उत्तरा भाद्रपद को भीतरी गहराई, आत्म-संयम और उस विवेक का नक्षत्र माना जाता है जो जल्दबाज़ चतुराई से नहीं, लंबे चिंतन से आता है।

प्रतीक

सामान्य प्रतीक अर्थी के पीछे के पाये हैं, जो पूर्वा भाद्रपद से शुरू हुई छवि को पूरा करते हैं; कुछ परंपराएँ जुड़वाँ को प्रतीक मानती हैं। पहले आधे की तरह यहाँ भी यह परिवर्तन और पूर्णता का चिह्न है, भय का नहीं। यह किसी बड़े प्रयास के बाद आने वाले शांत चरण का प्रतीक है — विश्राम, समाहार, और जो पूरा हो चुका उसे छोड़ देना।

गण, योनि और नाड़ी

उत्तरा भाद्रपद मनुष्य गण, गौ योनि (स्त्री) और मध्य (पित्त) नाड़ी का नक्षत्र है।

गुण मिलान में मनुष्य गण का मेल मनुष्य और देव गण से अच्छा रहता है, राक्षस गण से सबसे कम अंक आते हैं। गौ योनि का परंपरागत बैर व्याघ्र (बाघ) योनि से है, और दोनों की मध्य नाड़ी हो तो अपवाद न होने पर नाड़ी के 8 अंक नहीं मिलते। ये अंक केवल पहली छलनी हैं; कोई निष्कर्ष निकालने से पहले दोनों पूरी कुंडलियाँ साथ पढ़ी जाती हैं। कुंडली मिलान में हर कूट एक साथ दिखता है।

मुहूर्त में उत्तरा भाद्रपद

मुहूर्त चिंतामणि इसे चार ध्रुव (स्थिर) नक्षत्रों में रखता है — रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा के साथ। स्थिर नक्षत्र उन कामों के लिए चुने जाते हैं जो लंबे समय तक टिकने चाहिए: नींव का पत्थर रखना, गृह-प्रवेश, पेड़ लगाना, कोई दीर्घकालिक संकल्प, और पुराने समय में राज्याभिषेक। यह उत्तर भारतीय पंचक की अवधि में भी आता है, जिसमें कुछ परिवार गिने-चुने काम टालते हैं; दिन का पूरा विवरण पंचांग में मिलता है।

स्वभाव

उत्तरा भाद्रपद के जातक प्रायः शांत, उम्र से अधिक समझदार, उदार और संयमी बताए जाते हैं। शनि धैर्य, सहनशक्ति और गंभीरता देता है; मीन दया, कल्पना और आध्यात्मिक झुकाव। ऐसे लोग शांत, लगातार चलने वाले काम में कुशल होते हैं — परामर्श, अध्यापन, शोध, सेवा-कार्य, या कोई भी भूमिका जहाँ दूसरे इनकी स्थिरता पर टिकते हों।

इन्हें गुस्सा देर से आता है और बात देर से भूलती है; सबसे गहरी भावनाएँ ये अपने तक रखते हैं। परिवार और आश्रितों के प्रति कर्तव्य-बोध प्रायः बहुत मज़बूत होता है।

विकास के क्षेत्र इसी गहराई की छाया हैं। सब कुछ भीतर रखने से मन भारी हो सकता है; अकेले ज़िम्मेदारियाँ उठाना थका सकता है; और एकांत का प्रेम मदद माँगना कठिन बना सकता है। जीवन में हल्कापन, विश्राम और साझा प्रयास को जगह देना — यही संतुलन का पाठ है।

चारों चरण

उत्तरा भाद्रपद के चरणों की नवांश राशियाँ सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक हैं।

पहला चरण — मीन 3°20′ से 6°40′ (सिंह नवांश)

सूर्य का नवांश गरिमा, गर्मजोशी और सबके सामने ज़िम्मेदारी लेने की तत्परता देता है। यह सबसे आत्मविश्वासी चरण है, जो प्रायः दूसरों की सेवा में आगे बढ़कर नेतृत्व करता दिखता है।

दूसरा चरण — मीन 6°40′ से 10° (कन्या नवांश)

बुध का नवांश विश्लेषण, सटीकता और व्यावहारिक ढंग से मदद करने की क्षमता लाता है। मीन और कन्या आमने-सामने की राशियाँ हैं, इसलिए यह चरण कल्पना और बारीकी के बीच संतुलन बनाता है।

तीसरा चरण — मीन 10° से 13°20′ (तुला नवांश)

शुक्र का नवांश शालीनता, कूटनीति और सामंजस्य का प्रेम जोड़ता है। संबंध, कला और मध्यस्थता यहाँ प्रमुख विषय हैं; तुला में शनि उच्च का होता है, इसलिए नवांश में शनि यहाँ अच्छी स्थिति में रहता है।

चौथा चरण — मीन 13°20′ से 16°40′ (वृश्चिक नवांश)

मंगल का जलीय नवांश इसे सबसे तीव्र और गहराई में उतरने वाला चरण बनाता है: छिपे विषयों, शोध और भीतरी परिवर्तन में रुचि। बुध का परम नीच अंश, मीन 15°, इसी चरण में पड़ता है; वह नीचता भंग होती है या नहीं (नीचभंग), यह शेष कुंडली पर निर्भर है।

नामाक्षर

उत्तरा भाद्रपद के नामाक्षर हैं — दू, थ, झ, ञ। जैसे, चंद्रमा पहले चरण में हो तो परंपरा से नाम "दू" से आरंभ होगा। "ञ" से नाम कम ही बनते हैं, इसलिए कई परिवार चौथे चरण के लिए अपनी क्षेत्रीय सूची का अक्षर अपनाते हैं।

चंद्र, लग्न और ग्रह उत्तरा भाद्रपद में

जन्म-चंद्र यहाँ हो तो पहली महादशा शनि की होती है, और चंद्र राशि मीन होती है, इसलिए साढ़े साती जैसे गोचर मीन से गिने जाते हैं।

लग्न उत्तरा भाद्रपद में हो तो नक्षत्र-स्वामी शनि और राशि-स्वामी गुरु दोनों मिलकर व्यक्तित्व गढ़ते हैं: स्थिर, सिद्धांतनिष्ठ और अंतर्मुखी।

यहाँ बैठे ग्रह इस नक्षत्र का धैर्य और गहराई ले लेते हैं। फिर भी कोई एक स्थिति कुंडली का फ़ैसला नहीं करती; भाव, दृष्टि और दशा सब उसे बदलते हैं। अपनी स्थितियाँ देखने के लिए मुफ़्त कुंडली बनाइए। अगला नक्षत्र रेवती है, और शनि के अन्य दो नक्षत्र पुष्य और अनुराधा हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन है?

शनि। जन्म-चंद्र यहाँ हो तो पहली विंशोत्तरी महादशा शनि की होती है, जिसकी पूरी अवधि 19 वर्ष है; जन्म के समय कितनी बची है, यह चंद्रमा की नक्षत्र में स्थिति से निकलता है।

उत्तरा भाद्रपद किस राशि में है?

पूरी तरह मीन राशि में, 3°20′ से 16°40′ तक। इसलिए चंद्रमा किसी भी चरण में हो, चंद्र राशि मीन ही होगी।

क्या उत्तरा भाद्रपद में शुभ कार्य शुरू करना अच्छा है?

परंपरा इसे ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र मानती है, जो लंबे समय तक टिकने वाले कामों — नींव रखना, गृह-प्रवेश — के लिए उपयुक्त है। फिर भी तिथि, वार और लग्न समेत पूरा मुहूर्त देखना ज़रूरी है।

उत्तरा भाद्रपद के नामाक्षर क्या हैं?

दू, थ, झ और ञ — पहले से चौथे चरण तक।

शनि के अन्य नक्षत्र

हर ग्रह तीन नक्षत्रों का स्वामी है, एक-एक राशिचक्र के हर तिहाई में। इन तीनों में जन्मे लोगों की विंशोत्तरी दशा शनि की महादशा से शुरू होती है।

मनुष्य गण के अन्य नक्षत्र

अपनी कुंडली में देखें

स्रोत

  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • ऋग्वेद (अहिर्बुध्न्य)

यह पृष्ठ सतमार्ग ज्योतिष संपादकीय टीम ने शास्त्रीय ग्रंथों (मुख्यतः बृहत् पाराशर होरा शास्त्र) के आधार पर लिखा है। जहाँ परंपराएँ भिन्न हैं, वहाँ हमने यह स्पष्ट कहा है। ज्योतिष विचार के लिए मार्गदर्शन है — चिकित्सकीय, विधिक या वित्तीय सलाह नहीं। हमारी पद्धति